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राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, क्यार्दू, जिला-शिमला (हि०प्र०) भारतीय प्राच्य परम्परा में भारतीय संस्कृति की आधारभूत संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार को समर्पित हिमाचल के राजकीय संस्कृत महावि‌द्यालयों में विशिष्ट स्थान रखता है। स्वतंत्रता पूर्व तत्कालीन (मधान) रियासत के शासक की मन्त्र, उपासना, कर्मकाण्ड एवं ज्योतिष आदि विषयों में विशेष रुचि होने के कारण यह संस्थान संस्कृत पाठशाला के रूप में स्थापित किया गया। तत्पश्चात् संस्कृत-संस्कृति के अनुरागी, बु‌द्धिजीवियों के सतत् प्रयासों तथा सहयोग के फलस्वरूप धर्मपुर के दुर्गम स्थान पर यह संस्कृत पाठशाला निरन्तर कार्य करती रही। सन् 1961 में ग्राम क्यार्टू के लाला सतपाल सूद द्वारा भूमिदान देने पर श्री तारादत शर्मा के निर्देशन में इस महाविद्यालय को धर्मपुर मधान से क्यार्टू में स्थापित किया गया। तब आचार्य देव राम सती जी के प्रतिनिधित्व में इस संस्थान में अध्यापन कार्य संचालित होता रहा।

अगस्त 1965 में -श्री तारादत शर्मा करयाल व पंडित तुलसीराम शर्मा ग्राम बैठू के प्रयास से भारत के तत्कालीन प्रधानमन्त्री 'स्वर्गीय श्री लाल बहादुर शास्त्री के शुभाशीर्वाद से इस संस्कृत महाविद्यालय को हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा अधिगृहीत किया गया। मधान परिक्षेत्र की सुरम्य घाटियों, देवदार के हरे-भरे वनों के त्रिवेणी सगंम सहज त्रिभुजाकार टिक्करधार पर मां भगवती कामाक्षा के प्रांगण में देवदार, गल्ला के ऊंचे पेड़ों से आवेष्टित इस महाविद्यालय से अद्यपर्यन्त सैकड़ों छात्र-छात्राएं वि‌द्या प्राप्त कर स्वजीवन तथा समाज को ज्ञान के आलोक से आलोकित कर रहे हैं। इस महाविद्यालय में शिमला जिले के साथ सुदूर किन्नौर, कुल्लू, मंडी तक के छात्र वेद आदि वि‌द्याओं का अध्ययन करते हैं। यह राजकीय संस्कृत महाविद्यालय हिमाचल प्रदेश की श्रेष्ठ संस्कृत संस्थाओं में अग्रणी है। इस महाविद्यालय में विभिन्न विषय व्याकरण, साहित्य, दर्शन, ज्योतिष, वेद आदि संस्कृत परम्परागत विषयों के साथ-2 अंग्रेजी, इतिहास जैसे आधुनिक विषयों का भी अध्ययन-अध्यापन होता है।